कभी मुझे लगा था कि मेरी ज़िंदगी में आगे बढ़ने के रास्ते बंद हो गए हैं। योग ने मुझे फिर से खुद पर विश्वास करना और एक नई शुरुआत करना सिखाया।
“आई, मुझे तुम पर गर्व है।”मेरे बेटे के ये शब्द मेरे लिए किसी मेडल से भी ज़्यादा कीमती हैं।
नमस्कार, मैं सविता देशमुख। योग से जुड़ने से पहले मेरी ज़िंदगी बहुत अलग थी। मैं एक सुपरवाइज़र के पद पर काम करती थी और मुझे अपनी नौकरी से बहुत प्यार था। काम के साथ मैंने अपनी एमबीए की पढ़ाई भी पूरी की। अपने करियर में आगे बढ़ना और खुद को साबित करना मेरा सपना था।
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एक मुश्किल मोड़
2002 में मेरी एक किडनी निकालनी पड़ी थी। ठीक होने के बाद मैं फिर से अपनी सामान्य ज़िंदगी और काम पर लौट आई। मैंने अपनी स्वास्थ्य की परिस्थिति को कभी अपनी पहचान तक सीमित नहीं होने दिया।
लेकिन 2023 में दूसरी किडनी से जुड़ी परेशानियाँ सामने आईं। समय के साथ हालात कठिन होते गए और मुझे अपनी पसंद की नौकरी छोड़नी पड़ी। जिस काम से मुझे प्यार था, जो मेरी पहचान का हिस्सा था, उससे दूर होना बहुत मुश्किल था। मेरा आत्मविश्वास कम हो गया था और समझ नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या करूँ।
अपने लिए एक छोटा-सा कदम
उसी दौरान मैंने ऑनलाइन योग कक्षाएँ शुरू कीं। धीरे-धीरे मुझे अपने भीतर सकारात्मक बदलाव महसूस हुए। मुझे लगा कि यह अभ्यास मेरे मन को भी सहारा दे रहा है। मैंने तय किया कि योग को और गहराई से सीखूँगी—सबसे पहले अपने लिए, खुद को फिर से खड़ा करने के लिए।
एक मित्र ने मुझे सामने जाकर सीखने की सलाह दी। ट्रेन से सफ़र करना मेरे लिए आसान नहीं था, लेकिन सीखने की इच्छा और परिवार के साथ ने हिम्मत दी। मैंने योग का कोर्स जॉइन किया और वहीं से मेरी ज़िंदगी के एक नए सफ़र की शुरुआत हुई।
सही मार्गदर्शन, फिर से मिला विश्वास
मेरे शिक्षकों ने मेरी परिस्थिति को समझा और बहुत अपनापन दिया। मुझे अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करने का समय और प्रोत्साहन मिला। हर कक्षा से मैं खुशी और नई ऊर्जा लेकर लौटती थी।
इस सफ़र में मुझे योग में गोल्ड मेडल, योग डिप्लोमा और ज़ुम्बा का सर्टिफिकेट मिला। मेरे लिए ये केवल उपलब्धियाँ नहीं थीं। ये याद दिलाते थे कि मेरी ज़िंदगी यहाँ खत्म नहीं हुई है—अभी बहुत कुछ बाकी है। अपने शिक्षकों और परिवार के सहयोग के लिए मैं दिल से आभारी हूँ।
मेरी सबसे बड़ी ताकत: मेरा परिवार
मेरे पति और बच्चों ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। मेरी सफलता देखकर उनकी खुशी मेरे लिए बहुत मायने रखती है। जब मेरे बेटे ने कहा, “आई, मुझे तुम पर गर्व है। तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं थी, फिर भी तुमने यह सब पूरा किया,” तो लगा कि मेरी मेहनत का सबसे सुंदर फल मिल गया।
अब मेरा सपना
आज मैंने अपनी योग कक्षाएँ शुरू की हैं। योग से मुझे जो सकारात्मकता, हिम्मत और नया उद्देश्य मिला, उसे दूसरों तक पहुँचाना चाहती हूँ। मेरी इच्छा है कि तनाव, थकान या किसी कठिन दौर से गुज़र रहे लोग अपने लिए थोड़ा समय निकालें और अपने शरीर व मन के प्रति जागरूक बनें।
मेरे लिए योग कक्षाएँ सिर्फ़ एक व्यवसाय नहीं हैं। यह मेरा सपना है और मेरे जीवन को मिला एक नया अर्थ है। मैं चाहती हूँ कि जिन लोगों का आत्मविश्वास कम हो गया है, उन्हें भी अपनी ज़िंदगी को फिर से उत्साह के साथ देखने की प्रेरणा मिले।
मुश्किल परिस्थितियों में खुद पर विश्वास बनाए रखिए। कभी-कभी ज़िंदगी हमसे कुछ छीन लेती है, लेकिन अपने आप को एक नए तरीके से खोजने का मौका भी देती है।
योग किसी बीमारी के इलाज की दवा नहीं है। सही मार्गदर्शन और आवश्यक मेडिकल केयर के साथ यह एक स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बन सकता है।
यह मेरी योग यात्रा है। और यह तो बस शुरुआत है।
— सविता देशमुख